तारिक रहमान की 17 साल बाद बांग्लादेश वापसी: लाखों की भीड़, चुनावी हलचल तेज

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद 25 दिसंबर 2025 को अपने देश बांग्लादेश लौट आए हैं। उनके इस बांग्लादेश वापसी पर राजधानी ढाका का हवाई अड्डा लाखों की संख्या में लोगों से भर गया। यह नजारा बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है, खासकर आगामी संसदीय चुनावों को देखते हुए।
गुरुवार को ढाका पहुंचने के बाद तारिक रहमान का स्वागत करने के लिए इतनी भीड़ उमड़ी कि एयरपोर्ट परिसर में तिल धरने की जगह नहीं थी। समर्थकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। उन्होंने अपने परिवार के साथ वापसी की है, जिसमें उनकी पत्नी और बेटी भी शामिल थीं।
हवाई अड्डे से बाहर निकलने के बाद, तारिक रहमान ने लगभग 3 घंटे का एक भव्य रोड शो किया। इस दौरान उन्होंने देश में शांति बनाए रखने और एक “नया बांग्लादेश” बनाने की बात कही। उन्होंने लोगों से एकजुटता बनाए रखने की अपील की, लेकिन बांग्लादेश की निवर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना पर उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा।
उनकी यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब उनकी मां खालिदा जिया गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। फरवरी 2026 में होने वाले संसदीय चुनावों से ठीक पहले तारिक रहमान का लौटना बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्हें बीएनपी के प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
तारिक रहमान के लौटने से बांग्लादेश की राजनीति में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। बीएनपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खासा उत्साह है। उन्हें उम्मीद है कि उनकी मौजूदगी से पार्टी को आगामी चुनावों में बड़ी जीत मिल सकती है। पिछले साल अगस्त 2024 में शेख हसीना की आवामी लीग सरकार सत्ता से हटी थी, जिसके बाद से बीएनपी मुख्य दावेदार के रूप में उभरी है।
लंदन में 2018 से निर्वासित जीवन बिता रहे तारिक रहमान बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे। उनकी वापसी का रास्ता उनके खिलाफ दर्ज कई मुकदमों को रद्द किए जाने से साफ हुआ है। तारिक रहमान हमेशा से दावा करते रहे हैं कि ये सभी मामले राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थे।
बांग्लादेश में तारिक रहमान को “राजनीतिक राजघराने” का हिस्सा माना जाता है। वह पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। उनकी वापसी को लेकर उमड़ी भीड़ और जोरदार स्वागत इस बात का प्रमाण है कि बांग्लादेशी जनता के बीच उनकी गहरी पैठ है।
हालांकि, तारिक रहमान के सामने कई चुनौतियां भी हैं। उन्हें बीएनपी के भीतर आंतरिक अनुशासन बनाए रखना होगा। चुनावी अभियान के दौरान हिंसा को रोकना और ऐसे तत्वों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने जैसी चिंताओं को दूर करना उनके लिए महत्वपूर्ण होगा, जो सरकार से जुड़े नहीं हैं।
इसके अलावा, तारिक रहमान को “हवा भवन” काल (2001-2006) से जुड़ी पुरानी धारणाओं को भी पार करना होगा। इस दौरान कथित भ्रष्टाचार और “वैकल्पिक सत्ता केंद्र” के रूप में इसे देखा जाता था।
तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी का असर पड़ोसी देश भारत के साथ बांग्लादेश के संबंधों पर भी पड़ सकता है। शेख हसीना के जाने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा है। ऐसे में तारिक रहमान का नेतृत्व भविष्य में इन संबंधों को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
अपने पहले भाषणों में तारिक रहमान ने राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया। उन्होंने लोकतंत्र के लिए एक योजना प्रस्तुत की, जिसमें एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाने के लिए विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग की बात कही गई। उन्होंने आर्थिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी संबोधित करने की इच्छा व्यक्त की।
बांग्लादेश पहुंचने के तुरंत बाद, तारिक रहमान का पहला काम अपनी बीमार मां खालिदा जिया से एवरकेयर अस्पताल में मिलना था। इसके बाद उन्होंने अपने पिता जियाउर रहमान की कब्र पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वह राष्ट्रीय शहीद स्मारक का भी दौरा करेंगे। उन्हें अपने राष्ट्रीय पहचान पत्र और मतदाता पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी पूरा करना होगा।
तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी सिर्फ एक व्यक्ति की घर वापसी नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उनकी मौजूदगी से चुनावों में बीएनपी को निश्चित तौर पर मजबूती मिलेगी। बांग्लादेश अब एक महत्वपूर्ण चुनावी चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसमें तारिक रहमान की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

