बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया का 80 की उम्र में निधन

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और अनुभवी राजनेता खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने 30 दिसंबर, 2025 को ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके राजनीतिक दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने की है, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
खालिदा जिया पिछले काफी समय से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। इनमें लिवर सिरोसिस, गठिया, मधुमेह, छाती और हृदय संबंधी बीमारियां, साथ ही किडनी से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं। उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी और 29 नवंबर से वह गहन चिकित्सा इकाई (सीसीयू) में भर्ती थीं।
11 दिसंबर को उनकी हालत और नाजुक होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। निधन से कुछ ही दिन पहले, 29 दिसंबर को, उनके नाम पर 13वें जातीय संसद चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। यह नामांकन बोगुरा-7 और फेनी-1 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए किया गया था।
जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों से बरी कर दिया था। इस फैसले के बाद उन्हें फरवरी में होने वाले आम चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिल गई थी। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से उन्हें लंदन में भी चिकित्सा उपचार कराना पड़ा था, जिसके बाद वह मई में बांग्लादेश लौटी थीं।
खालिदा जिया का राजनीतिक सफर: एक लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा
खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा। वह बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं। 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की कमान संभाली और पार्टी को एकजुट रखने व मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिया ने तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
वह 1991 से 1996, 2001 से 2006 तक और फिर 2007 में कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री रहीं। बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में वह पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, जिन्होंने देश को एक नई दिशा देने का प्रयास किया।
उनके कार्यकाल के दौरान बांग्लादेश ने आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे। उन्होंने खासकर महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर जोर दिया। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा, उन्हें कई बार कड़े विरोध और राजनीतिक उठापटक का सामना करना पड़ा।
पिछले कुछ सालों से खालिदा जिया भ्रष्टाचार के कई मामलों का सामना कर रही थीं। इन मामलों के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनवरी 2025 में बरी किए जाने से उन्हें राजनीतिक वापसी की उम्मीद मिली थी, लेकिन उनकी बिगड़ती सेहत ने उनके रास्ते में बाधा डाली। उनके निधन से कुछ दिन पहले ही उनके बेटे तारिक रहमान भी लंदन से बांग्लादेश लौटे थे।
तारिक रहमान लगभग 17 साल के निर्वासन के बाद देश लौटे थे। उनकी वापसी को राजनीतिक गलियारों में बीएनपी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया था।
खालिदा जिया और शेख हसीना, ये दो नाम बांग्लादेश की राजनीति में दशकों तक एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे। दोनों ने ही देश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। जिया के निधन से बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।
बीएनपी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी ने उन्हें एक साहसी नेता और लोकतंत्र की प्रतीक बताया है।
उनकी याद में देश भर में कई कार्यक्रमों और शोक सभाओं का आयोजन किया जाएगा। जिया के परिवार के सदस्यों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ढाका के अस्पताल में उनके अंतिम दर्शन किए। उनके पार्थिव शरीर को ढाका में ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त, 1945 को दिनाजपुर जिले के ईसगाँव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिनाजपुर में हुई और बाद में उन्होंने सुरेन्द्रनाथ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उनका विवाह 1960 में जियाउर रहमान से हुआ था, जो उस समय एक सैन्य अधिकारी थे।
राजनीति में आने से पहले खालिदा जिया एक गृहिणी थीं। पति की हत्या के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। यह उनके लिए एक बड़ा मोड़ था, क्योंकि उन्हें एक ऐसे दल का नेतृत्व करना था जो अपने संस्थापक को खो चुका था। उन्होंने इस चुनौती को बखूबी निभाया और पार्टी को फिर से मजबूत किया।
बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली और सैन्य शासन के खिलाफ संघर्ष में उनकी भूमिका को हमेशा याद किया जाएगा। 1980 के दशक में उन्होंने सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद के खिलाफ एक लंबा और कठिन संघर्ष लड़ा, जिसके परिणामस्वरूप 1990 में लोकतंत्र की वापसी हुई।
जिया के समर्थक उन्हें ‘लोकतंत्र की माँ’ के नाम से पुकारते थे। हालांकि, उनके आलोचक उन्हें भ्रष्टाचार और राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए जिम्मेदार ठहराते थे।
इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्होंने बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उनका निधन न केवल बीएनपी के लिए, बल्कि पूरे बांग्लादेश के लिए एक बड़ी क्षति है। अब सवाल यह है कि खालिदा जिया के बिना बीएनपी का भविष्य क्या होगा। उनके बेटे तारिक रहमान पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं और उन पर नेतृत्व की जिम्मेदारी आ सकती है। हालांकि, पार्टी के सामने अपनी पहचान बनाए रखने और आगामी चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करने की चुनौती होगी।

