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विदेश8 जून, 2026 | 19:28

मिडिल ईस्ट संकट के बीच आई बड़ी राहत, ईरान ने इजरायल पर रोके हमले

मिडिल ईस्ट संकट में राहत, ईरान ने इजरायल पर हमले रोके

विदेश वार्ताहर

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मिडिल ईस्ट संकट में राहत, ईरान ने इजरायल पर हमले रोके

मिडिल ईस्ट संकट के बीच बड़ी और राहत भरी खबर आई है। ईरान ने इजरायल पर अपने सभी हवाई हमले रोक दिए हैं, लेकिन लेबनान के मुद्दे पर गंभीर चेतावनी जारी की है।

मिडिल ईस्ट संकट में राहत, ईरान ने इजरायल पर हमले रोके

दुनिया भर को परेशान कर रहे मिडिल ईस्ट संकट के बीच एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने इजरायल के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाइयों और हमलों को फिलहाल पूरी तरह से रोक दिया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध का खतरा थोड़ा टल गया है।

तेहरान से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वे अभी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। हालांकि इस युद्ध विराम के साथ ही ईरान ने इजरायल को लेबनान के मुद्दे पर गंभीर परिणाम भुगतने की सीधी चेतावनी भी दे दी है। इस घोषणा के बाद वैश्विक शेयर बाजारों ने भी राहत की सांस ली है।

मिडिल ईस्ट संकट में बड़ी राहत

पिछले कई हफ्तों से चल रहे भारी तनाव के बाद इस घोषणा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान के इस कदम से दोनों देशों के बीच सीधे युद्ध की आशंका काफी कम हो गई है। खाड़ी देशों के अन्य नेताओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।

संयुक्त राष्ट्र और कई बड़े देशों के राजनयिक लगातार दोनों पक्षों से शांति की अपील कर रहे थे। ईरान ने साफ किया है कि उसका मकसद क्षेत्र में बेवजह तबाही मचाना नहीं है। वह केवल अपनी संप्रभुता यानी खुद की सीमाओं की रक्षा के लिए कदम उठा रहा था।

तेहरान ने अचानक बदला फैसला

ईरान के सैन्य कमांडरों ने बताया कि राष्ट्रपति और सर्वोच्च नेता की सलाह के बाद यह फैसला लिया गया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों को तुरंत प्रभाव से रोकने के आदेश सेना को दे दिए गए हैं। इस फैसले ने इजरायल के रक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है।

जानकारों का मानना है कि ईरान पर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का भारी दबाव था। आर्थिक पाबंदियों और तेल बाजार पर पड़ रहे बुरे असर को देखते हुए ईरान ने अपनी रणनीति बदली है। वह अब कूटनीतिक रास्तों को अधिक तरजीह देना चाहता है।

लेबनान को लेकर सख्त चेतावनी

हमले रोकने के साथ ही ईरान ने लेबनान के मोर्चे पर इजरायल को कड़े शब्दों में आगाह किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यदि इजरायल ने लेबनान पर जमीनी हमला तेज किया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। लेबनान पर किसी भी तरह का बड़ा संकट ईरान को दोबारा युद्ध में धकेल सकता है।

ईरान लेबनान के भीतर सक्रिय हिजबुल्लाह संगठन का पुराना मददगार रहा है। उसने साफ संदेश दिया है कि अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है। इस चेतावनी के बाद लेबनान सीमा पर तनाव अभी भी बरकरार है।

इजरायल का जवाबी रुख

ईरान के इस ऐलान पर इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक कोई बड़ी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। तेल अवीव में सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक बुलाई गई है। इजरायली सेना के अधिकारी इस घोषणा को पूरी तरह सच मानने से बच रहे हैं।

इजरायल के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उनकी सेना हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट यानी पूरी तरह सतर्क मोड पर रहेगी। वे अपनी सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेंगे। हवाई सुरक्षा तंत्र को अभी भी सक्रिय रखा गया है।

वैश्विक बाजारों पर सकारात्मक असर

इस खबर के आते ही दुनिया भर के बाजारों में भारी तेजी देखी गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर अचानक ब्रेक लग गया है, जिससे विकासशील देशों को बड़ी राहत मिलेगी। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का भरोसा वापस लौटा है।

सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की कीमतों में भी थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अगर यह शांति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने में मदद मिलेगी।

अमेरिकी सरकार की पैनी नजर

अमेरिका ने इस पूरे घटनाक्रम का बारीकी से अध्ययन करना शुरू कर दिया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ताओं ने कहा कि वे ईरान के इस कदम की सराहना करते हैं, लेकिन उसकी हर हरकत पर उनकी नजर बनी हुई है। अमेरिका अपने सहयोगी इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

अमेरिकी विदेश मंत्री जल्द ही इस मुद्दे पर खाड़ी के अन्य देशों के नेताओं से फोन पर बात कर सकते हैं। वे चाहते हैं कि इस अस्थाई शांति को एक स्थाई समझौते में बदल दिया जाए ताकि भविष्य में दोबारा ऐसा संकट न खड़ा हो।

आम जनता ने ली राहत की सांस

युद्ध के मुहाने पर खड़े इस क्षेत्र के आम नागरिकों के लिए यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है। तेहरान और तेल अवीव की सड़कों पर रहने वाले लोग पिछले कई दिनों से डर के साए में जी रहे थे। अब हवाई हमलों के सायरन बजने बंद हो गए हैं।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अब जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट आएगा। स्कूल, कॉलेज और बाजार फिर से सामान्य रूप से खुलने लगे हैं। लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि दोनों देशों के नेता अब बातचीत के जरिए विवादों का निपटारा करें।

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