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देश8 जून, 2026 | 18:50

पुलिस एनकाउंटर पर योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने उठाए सवाल, अपनी ही सरकार को घेरा

पुलिस एनकाउंटर पर योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने उठाए सवाल

देश वार्ताहर

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पुलिस एनकाउंटर पर योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने उठाए सवाल

पुलिस एनकाउंटर पर योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर को लेकर राजनीति गरमा गई है। योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने अपनी ही सरकार की पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ चल रहे पुलिस एनकाउंटर (पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़) को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस बार विपक्ष के बजाय खुद सत्ता पक्ष के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने अपनी ही सरकार की पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैबिनेट मंत्री के इस रुख के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस बयान ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर हो रही चर्चा को एक नया मोड़ दे दिया है।

योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद का रुख

निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ने हाल ही में हुए एक मुठभेड़ मामले को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा कि पुलिस को किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन करने की छूट नहीं मिलनी चाहिए। हर मामले की पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी जरूरी है।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने के नाम पर निर्दोष लोगों को निशाना नहीं बनाया जा सकता। मंत्री के इस तीखे बयान ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी सोच में डाल दिया है। वे अपनी ही सरकार के कामकाज के तरीके से नाखुश दिखाई दे रहे हैं।

निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

कैबिनेट मंत्री ने मांग की है कि हाल के दिनों में हुए सभी संदेहास्पद एनकाउंटर की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि अगर पुलिस की कार्रवाई पर जनता के मन में कोई संदेह है, तो सरकार को उसे तुरंत दूर करना चाहिए। जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री को इस संबंध में एक पत्र लिखने की बात भी कही है। संजय निषाद का कहना है कि वे इस मुद्दे को कैबिनेट की बैठक में भी पूरी मजबूती से उठाएंगे। वे चाहते हैं कि पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।

अपनी बिरादरी के हितों की चिंता

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संजय निषाद का यह कदम अपनी पारंपरिक राजनीति को बचाने की एक कोशिश है। पिछले कुछ समय से उनकी बिरादरी के लोगों ने पुलिस की कुछ कार्रवाइयों को लेकर असंतोष जताया था। समाज के लोगों का दबाव ही उनके इस बयान की मुख्य वजह माना जा रहा है।

संजय निषाद ने हमेशा पिछड़ों और वंचितों की राजनीति की है। उन्हें डर है कि अगर वे इस समय चुप रहे, तो उनके मतदाता उनसे छिटक सकते हैं। इसलिए उन्होंने सरकार में रहते हुए भी अपनी ही पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलने का फैसला लिया।

विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा

सरकार के भीतर से उठी इस आवाज ने विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा हथियार दे दिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने मंत्री के बयान का स्वागत किया है। विपक्ष का कहना है कि जो बात वे लंबे समय से कह रहे थे, अब सरकार के मंत्री भी वही बोल रहे हैं।

विपक्षी प्रवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगते हुए कहा है कि जब उनके अपने मंत्री को ही पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो आम जनता कैसे सुरक्षित महसूस करेगी। इस बयान के बाद विधानसभा के आगामी सत्र में भारी हंगामे के पूरे आसार बन गए हैं।

भाजपा नेतृत्व ने साधी चुप्पी

संजय निषाद के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। पार्टी का कोई भी बड़ा पदाधिकारी इस मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहा है। हालांकि अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि संगठन इस बयान से काफी असहज है।

भाजपा के रणनीतिकार अब इस विवाद को शांत करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि सहयोगी दलों के साथ उनके रिश्तों में किसी भी तरह की खटास आए। गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।

सरकार के सामने नई चुनौती

यह पहली बार नहीं है जब किसी सहयोगी दल ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। लेकिन कानून व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कैबिनेट मंत्री का ऐसा रुख सरकार के लिए एक नई प्रशासनिक चुनौती बन गया है। इससे सरकार की जीरो टॉलरेंस (अपराध के प्रति बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति) पर सवाल उठने लगे हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहा है। गृह विभाग के अधिकारियों से हालिया मुठभेड़ों की पूरी रिपोर्ट तलब की गई है। सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस विवाद का असर राज्य की कानून व्यवस्था की छवि पर न पड़े।

आगे की राजनीतिक राह

आने वाले दिनों में इस बयान का असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर साफ दिखाई देगा। संजय निषाद का अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। क्या वे अपने स्टैंड पर कायम रहेंगे या दबाव में आकर अपने सुर बदल लेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

फिलहाल राज्य के राजनीतिक माहौल में तनाव साफ महसूस किया जा सकता है। यह विवाद आने वाले समय में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है। दोनों ही तरफ के नेता फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं ताकि कोई बड़ा राजनीतिक नुकसान न हो।

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